"अति सर्वत्र वर्जयेत—किसी भी चीज़ की अति नुकसानदेह होती है।"

"Excess of anything is harmful."

जीवन का संतुलन: चाहे वह भोजन हो, बोलना हो, या भावनाओं का प्रदर्शन—संतुलन ही सुखी जीवन का आधार है। जब हम किसी भी चीज़ की सीमा पार करते हैं, तो वह विष के समान हो जाती है।

संयम की आवश्यकता: अनुशासन और सीमा का ज्ञान होना ही बुद्धिमानी है। मध्यम मार्ग अपनाना ही तनावमुक्त रहने और दीर्घायु होने का सबसे प्राचीन और प्रभावी सूत्र है।

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